यह योजना क्या देती है
यह योजना सीधे व्यक्तियों को पैसा नहीं देती, बल्कि दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को वित्तीय सहायता देती है, जिससे वे विशेष स्कूल, वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, चिकित्सा पुनर्वास केंद्र, प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र, और सामुदायिक आधारित पुनर्वास कार्यक्रम चला सकें। इन केंद्रों में दिव्यांग बच्चों और वयस्कों को शिक्षा, व्यावसायिक कौशल, चिकित्सा देखभाल, और स्वतंत्र जीवन जीने के कौशल सिखाए जाते हैं। यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थानीय, समुदाय-आधारित संगठनों की मौजूदा विशेषज्ञता का उपयोग करके, दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक भी दिव्यांगजन सेवाएं पहुंचाता है।
कौन पात्र है
- कोई भी दिव्यांग व्यक्ति (सभी प्रकार की दिव्यांगता — शारीरिक, दृष्टि, श्रवण, बौद्धिक, मानसिक) — DDRS-वित्तपोषित NGO केंद्रों में सेवा के लिए।
- गैर-सरकारी संगठन जो दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में काम करते हैं, वे संस्था के रूप में सरकारी अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
- दिव्यांगता प्रमाण पत्र (UDID कार्ड)
- आधार कार्ड
- आय प्रमाण, कुछ सेवाओं के लिए
सेवाओं का लाभ कैसे लें
- depwd.gov.in पर जाकर या अपने ज़िले के सामाजिक न्याय विभाग से नज़दीकी DDRS-वित्तपोषित NGO केंद्र की जानकारी लें।
- संबंधित केंद्र में सीधे जाकर पंजीकरण कराएं और दिव्यांगता प्रमाण पत्र दिखाएं।
- केंद्र की सेवाओं (शिक्षा, प्रशिक्षण, चिकित्सा पुनर्वास) के अनुसार दाखिला/उपचार शुरू होता है।
- कई केंद्र मुफ्त या बहुत कम शुल्क पर सेवाएं देते हैं — विशिष्ट शुल्क संरचना केंद्र से पुष्टि करें।