फ़ाइल क्रमांक CS-TRN-003 · केंद्रीय योजना · पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय

सागरमाला कार्यक्रम

भारत के 7,500 किमी लंबे समुद्री तट के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण — बंदरगाह विकास, बंदरगाह संपर्क सड़कें, और तटीय आर्थिक क्षेत्रों के ज़रिए लॉजिस्टिक्स लागत कम करना।

ज़रूरी बात: यह एक राष्ट्रीय बंदरगाह-बुनियादी ढांचा कार्यक्रम है, न कि कोई व्यक्तिगत नकद लाभ वाली योजना।

यह कार्यक्रम क्या है

मार्च 2015 में स्वीकृत सागरमाला का लक्ष्य भारत के बंदरगाह-आधारित विकास को गति देना है — देश के व्यापार का 95% (मात्रा के हिसाब से) समुद्री मार्ग से होता है, लेकिन बंदरगाहों की क्षमता और उन तक संपर्क अक्सर बाधा बनते हैं। इस कार्यक्रम के तहत मौजूदा बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, नए बंदरगाहों का निर्माण, बंदरगाहों को रेल/सड़क से बेहतर जोड़ना, तटीय आर्थिक क्षेत्र (जहां विनिर्माण इकाइयां बंदरगाह के पास स्थापित हों), और तटीय समुदाय विकास जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इससे माल ढुलाई की लागत कम होती है, निर्यात-आयात तेज़ होता है, और तटीय क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर बनते हैं।

यह किसके लिए है

  • यह एक राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा कार्यक्रम है — व्यक्तिगत लाभार्थी पात्रता की कोई अवधारणा नहीं है।
  • तटीय राज्यों के निवासी, मछुआरे, और व्यापारी अप्रत्यक्ष रूप से बेहतर बंदरगाह सुविधाओं और रोज़गार अवसरों से लाभान्वित होते हैं।

परियोजना की जानकारी कैसे देखें

  1. sagarmala.gov.in पर जाकर अपने क्षेत्र में चल रही या प्रस्तावित सागरमाला परियोजनाओं की जानकारी देखी जा सकती है।
  2. तटीय समुदाय विकास परियोजनाओं में भागीदारी के लिए स्थानीय बंदरगाह प्राधिकरण या ज़िला प्रशासन से संपर्क करें।