यह योजना क्या देती है
नियमित GST व्यवस्था में हर लेनदेन पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का हिसाब रखना और महीने में कई रिटर्न भरना पड़ता है — छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के लिए यह बोझिल हो सकता है। कंपोज़िशन स्कीम इसे सरल बनाती है: पात्र व्यापारी अपने टर्नओवर पर एक तय, कम दर से कर भरते हैं (विनिर्माताओं और व्यापारियों के लिए 1%, रेस्टोरेंट के लिए 5%, सेवा प्रदाताओं के लिए 6%), और हर महीने की बजाय हर तिमाही में सिर्फ एक साधारण रिटर्न भरना होता है। हालांकि, इस स्कीम में शामिल व्यापारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकते, और न ही अपने ग्राहकों से टैक्स वसूल सकते हैं (टैक्स इनवॉइस की जगह बिल ऑफ सप्लाई जारी होता है)।
कौन पात्र है
- वार्षिक टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से कम वाले व्यापारी (कुछ विशेष श्रेणी राज्यों में सीमा ₹75 लाख है)।
- सेवा प्रदाताओं के लिए (2019 से जुड़ी अलग श्रेणी), सीमा ₹50 लाख है।
- अंतर-राज्यीय आपूर्ति (एक राज्य से दूसरे राज्य में माल/सेवा बेचना) करने वाले व्यापारी पात्र नहीं हैं।
- ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के माध्यम से बेचने वाले कुछ व्यापारी भी बाहर रखे गए हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
- GST पंजीकरण (मौजूदा या नया)
- पैन कार्ड
- व्यवसाय पंजीकरण प्रमाण
- बैंक खाता विवरण
पंजीकरण कैसे करें
- gst.gov.in पर लॉगिन करें।
- "Services" → "Registration" → "Application to Opt for Composition Levy" (फॉर्म CMP-02) चुनें।
- नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले (आमतौर पर 31 मार्च तक) आवेदन जमा करें, ताकि उस वर्ष के लिए स्कीम लागू हो सके।
- नए GST पंजीकरण के मामले में, पंजीकरण के समय ही कंपोज़िशन स्कीम का विकल्प चुना जा सकता है।
- स्वीकृति के बाद, हर तिमाही CMP-08 के ज़रिए कर भुगतान करें और सालाना GSTR-4 रिटर्न भरें।