फ़ाइल क्रमांक CS-SKL-001 · केंद्रीय योजना · ग्रामीण विकास मंत्रालय

मनरेगा — महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन गारंटीड अकुशल मजदूरी वाले रोजगार का कानूनी अधिकार — मांगने पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी।

यह योजना क्या देती है

2005 के एक कानून के तहत बनी मनरेगा भारत की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है — यह "गारंटी" शब्द को गंभीरता से लेती है। हर ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने को इच्छुक हैं, हर वित्तीय वर्ष में 100 दिन के रोजगार का हकदार है। मज़दूरी सीधे बैंक या डाकघर खाते में जमा होती है, दर राज्य के अनुसार तय होती है, और काम मांगने के 15 दिनों के भीतर न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है। काम में आमतौर पर जल संरक्षण, सड़क निर्माण, वृक्षारोपण, और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े काम शामिल होते हैं।

कौन पात्र है

  • ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला कोई भी परिवार।
  • परिवार के वयस्क सदस्य (18 वर्ष या अधिक) अकुशल शारीरिक श्रम करने को इच्छुक हों।
  • परिवार को पहले जॉब कार्ड के लिए आवेदन करना होता है।

आवश्यक दस्तावेज़

  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण (ग्राम पंचायत क्षेत्र में)
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो (परिवार के सभी वयस्क सदस्यों की)
  • बैंक/डाकघर खाता विवरण

जॉब कार्ड कैसे बनवाएं

  1. अपने ग्राम पंचायत कार्यालय में जॉब कार्ड के लिए आवेदन फॉर्म जमा करें।
  2. परिवार के सभी इच्छुक वयस्क सदस्यों के फोटो और पहचान दस्तावेज़ दें।
  3. पंचायत 15 दिनों के भीतर जॉब कार्ड जारी करती है — इसमें परिवार के हर पात्र सदस्य का विवरण होता है।
  4. काम चाहिए होने पर, पंचायत में लिखित आवेदन दें (या स्थानीय रोज़गार सहायक को बताएं)।
  5. 15 दिनों के भीतर काम मिलना चाहिए — न मिलने पर आप बेरोज़गारी भत्ते के हकदार हैं।
  6. nrega.nic.in पर अपने जॉब कार्ड की स्थिति, मज़दूरी भुगतान और काम के दिन कभी भी देख सकते हैं।