यह कार्यक्रम क्या है
जून 2014 में शुरू हुआ नमामि गंगे भारत की सबसे बड़ी नदी संरक्षण पहलों में से एक है, जो गंगा नदी बेसिन के प्रदूषण को कम करने और नदी की पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने के लिए काम करता है। इसके मुख्य कार्य क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर (शहरों से नदी में सीधे गिरने वाले गंदे पानी को रोकना), नदी तट विकास (घाटों का सुधार, श्मशान घाट आधुनिकीकरण), जैव विविधता संरक्षण (गंगा में पाई जाने वाली मछली, डॉल्फिन जैसी प्रजातियों की रक्षा), वनीकरण (नदी तट पर वृक्षारोपण), और जन जागरूकता अभियान शामिल हैं। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) द्वारा राज्य सरकारों के साथ मिलकर लागू किया जाता है।
यह किसके लिए है
- यह एक पर्यावरण एवं बुनियादी ढांचा कार्यक्रम है — व्यक्तिगत लाभार्थी पात्रता की कोई अवधारणा नहीं है।
- गंगा बेसिन क्षेत्र (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल) के सभी निवासी अप्रत्यक्ष रूप से इससे लाभान्वित होते हैं — स्वच्छ जल, बेहतर स्वास्थ्य, और नदी-आधारित आजीविका के ज़रिए।
जुड़ना चाहते हैं?
nmcg.nic.in पर कार्यक्रम की प्रगति, चल रही परियोजनाओं, और स्वयंसेवी अवसरों की जानकारी मिल सकती है। गंगा से जुड़ी किसी गंभीर प्रदूषण गतिविधि की शिकायत के लिए भी पोर्टल पर संपर्क किया जा सकता है।