फ़ाइल क्रमांक CS-SKL-004 · केंद्रीय योजना · कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना — NAPS

अप्रेंटिस को दी जाने वाली वजीफा राशि का एक हिस्सा सरकार सीधे सब्सिडी के रूप में देती है — कंपनियों को ज़्यादा अप्रेंटिस रखने और युवाओं को सीखते हुए कमाई का मौका देने के लिए।

यह योजना क्या देती है

1961 के अप्रेंटिस अधिनियम के तहत हर उद्योग को एक तय अनुपात में अप्रेंटिस रखना ज़रूरी है, लेकिन वजीफे का पूरा खर्च कंपनियों के लिए एक बाधा बन सकता है। NAPS, 19 अगस्त 2016 से, इस बाधा को कम करती है — सरकार हर अप्रेंटिस के वजीफे का 25% हिस्सा (अधिकतम ₹1,500 प्रति माह) सीधे कंपनी को देती है, ताकि कंपनियों के लिए ज़्यादा अप्रेंटिस रखना आसान हो। इसके अलावा बुनियादी प्रशिक्षण (Basic Training) की लागत भी सरकार वहन करती है। अप्रेंटिस के लिए यह वास्तविक कार्य अनुभव, प्रमाणित कौशल, और नियमित कमाई का एक साथ मौका है — सिर्फ कक्षा में सीखने की बजाय।

कौन पात्र है

  • अप्रेंटिस के लिए: 14 वर्ष या उससे अधिक उम्र (व्यवसाय के अनुसार न्यूनतम आयु अलग हो सकती है), न्यूनतम कक्षा 5 पास या ITI/डिप्लोमा योग्यता।
  • नियोक्ता (कंपनी) के लिए: कोई भी प्रतिष्ठान जो अप्रेंटिस अधिनियम के तहत पंजीकृत है और अप्रेंटिस रखता है।

आवश्यक दस्तावेज़

  • आधार कार्ड
  • शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र
  • बैंक खाता विवरण
  • नियोक्ता का पंजीकरण विवरण (कंपनी के लिए)

आवेदन कैसे करें

  1. apprenticeshipindia.gov.in पर जाकर उम्मीदवार के रूप में पंजीकरण करें, अपनी योग्यता और रुचि की जानकारी भरें।
  2. पोर्टल पर सूचीबद्ध कंपनियों/प्रतिष्ठानों में उपलब्ध अप्रेंटिसशिप अवसरों के लिए आवेदन करें।
  3. चुने जाने पर, नियोक्ता के साथ अनुबंध साइन होता है, जो पोर्टल पर पंजीकृत होता है।
  4. प्रशिक्षण अवधि के दौरान, वजीफा हर महीने मिलता है — इसमें सरकार का 25% हिस्सा भी शामिल है।
  5. प्रशिक्षण पूरा होने पर, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र मिलता है।