यह योजना क्या देती है
1 जुलाई 2015 को शुरू हुई यह योजना सिंचाई से जुड़ी कई पुरानी योजनाओं को एक छतरी के नीचे लाती है, और तीन मुख्य लक्ष्यों पर काम करती है — सिंचाई क्षेत्र का विस्तार, पानी के उपयोग की दक्षता बढ़ाना, और सतत जल प्रबंधन को बढ़ावा देना। सबसे लोकप्रिय हिस्सा "प्रति बूंद अधिक फसल" (Per Drop More Crop) है, जिसके तहत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लगाने के लिए भारी सब्सिडी मिलती है — छोटे/सीमांत किसानों के लिए 55% तक और अन्य किसानों के लिए 45% तक (कुछ श्रेणियों में यह 80% तक भी जा सकती है)। इससे पानी की बर्बादी कम होती है, फसल की पैदावार बढ़ती है, और बिजली/डीज़ल की भी बचत होती है।
कौन पात्र है
- कोई भी किसान, चाहे भूमि का आकार कुछ भी हो — छोटे और सीमांत किसानों को अधिक सब्सिडी मिलती है।
- व्यक्तिगत किसान, किसानों का समूह, या सहकारी समिति।
- भूमि पर स्पष्ट स्वामित्व/पट्टे का प्रमाण होना ज़रूरी है।
आवश्यक दस्तावेज़
- भूमि के स्वामित्व/पट्टे के दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- बैंक खाता विवरण
- जल स्रोत (कुआं/बोरवेल/नहर) का प्रमाण
आवेदन कैसे करें
- अपने ज़िले के कृषि विभाग या उद्यान विभाग कार्यालय से संपर्क करें।
- pmksy.gov.in पर या राज्य के माइक्रो-इरिगेशन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें।
- भूमि और जल स्रोत की जानकारी के साथ आवेदन जमा करें।
- तकनीकी सर्वेक्षण के बाद, सूचीबद्ध वेंडर से ड्रिप/स्प्रिंकलर सिस्टम लगवाएं।
- इंस्टॉलेशन सत्यापन के बाद, सब्सिडी राशि सीधे बैंक खाते में या लागत में समायोजित होती है।