फ़ाइल क्रमांक CS-AGR-031 · केंद्रीय योजना · नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय

पीएम-कुसुम योजना

किसानों को खेतों में सोलर पंप लगाने के लिए भारी सब्सिडी — डीज़ल पंप पर निर्भरता खत्म करने के लिए, साथ ही सोलर पावर बेचकर अतिरिक्त आय की संभावना भी।

यह योजना क्या देती है

2019 में शुरू हुई कुसुम (किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना के तीन घटक हैं। घटक A के तहत किसान अपनी बंजर/असिंचित भूमि पर छोटे सोलर पावर प्लांट (0.5-2 मेगावाट) लगाकर बिजली बोर्ड को बिजली बेच सकते हैं। घटक B के तहत स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाने पर 60% तक सब्सिडी मिलती है (केंद्र और राज्य मिलकर), किसान को सिर्फ 10% लागत वहन करनी होती है, बाकी 30% बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध है। घटक C मौजूदा ग्रिड-जुड़े पंपों को सोलर में बदलने में मदद करता है। यह योजना डीज़ल की बढ़ती लागत और अनियमित बिजली आपूर्ति, दोनों समस्याओं का समाधान करती है।

कौन पात्र है

  • व्यक्तिगत किसान, किसानों का समूह, सहकारी समिति, पंचायत, या किसान उत्पादक संगठन (FPO)।
  • सोलर पावर प्लांट (घटक A) के लिए, बिजली बोर्ड के सबस्टेशन के 5 किमी के भीतर भूमि होनी चाहिए।
  • सोलर पंप (घटक B) के लिए, खेत में सिंचाई की ज़रूरत और पंप की उपयुक्त क्षमता का आकलन आवश्यक है।

आवश्यक दस्तावेज़

  • भूमि के स्वामित्व/पट्टे के दस्तावेज़
  • आधार कार्ड
  • बैंक खाता विवरण
  • बिजली कनेक्शन विवरण, जहां लागू हो

आवेदन कैसे करें

  1. pmkusum.mnre.gov.in पर जाकर या अपने राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी के माध्यम से आवेदन करें।
  2. अपनी भूमि, सिंचाई ज़रूरत, और चुने गए घटक (A/B/C) की जानकारी भरें।
  3. भूमि दस्तावेज़ और बैंक विवरण जमा करें।
  4. राज्य नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा तकनीकी सर्वेक्षण और स्वीकृति दी जाती है।
  5. स्वीकृति के बाद, सूचीबद्ध वेंडर के ज़रिए सोलर पंप/प्लांट लगाया जाता है, और सब्सिडी सीधे लागत में समायोजित होती है।