यह योजना क्या देती है
2019 में शुरू हुई कुसुम (किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना के तीन घटक हैं। घटक A के तहत किसान अपनी बंजर/असिंचित भूमि पर छोटे सोलर पावर प्लांट (0.5-2 मेगावाट) लगाकर बिजली बोर्ड को बिजली बेच सकते हैं। घटक B के तहत स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाने पर 60% तक सब्सिडी मिलती है (केंद्र और राज्य मिलकर), किसान को सिर्फ 10% लागत वहन करनी होती है, बाकी 30% बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध है। घटक C मौजूदा ग्रिड-जुड़े पंपों को सोलर में बदलने में मदद करता है। यह योजना डीज़ल की बढ़ती लागत और अनियमित बिजली आपूर्ति, दोनों समस्याओं का समाधान करती है।
कौन पात्र है
- व्यक्तिगत किसान, किसानों का समूह, सहकारी समिति, पंचायत, या किसान उत्पादक संगठन (FPO)।
- सोलर पावर प्लांट (घटक A) के लिए, बिजली बोर्ड के सबस्टेशन के 5 किमी के भीतर भूमि होनी चाहिए।
- सोलर पंप (घटक B) के लिए, खेत में सिंचाई की ज़रूरत और पंप की उपयुक्त क्षमता का आकलन आवश्यक है।
आवश्यक दस्तावेज़
- भूमि के स्वामित्व/पट्टे के दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- बैंक खाता विवरण
- बिजली कनेक्शन विवरण, जहां लागू हो
आवेदन कैसे करें
- pmkusum.mnre.gov.in पर जाकर या अपने राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी के माध्यम से आवेदन करें।
- अपनी भूमि, सिंचाई ज़रूरत, और चुने गए घटक (A/B/C) की जानकारी भरें।
- भूमि दस्तावेज़ और बैंक विवरण जमा करें।
- राज्य नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा तकनीकी सर्वेक्षण और स्वीकृति दी जाती है।
- स्वीकृति के बाद, सूचीबद्ध वेंडर के ज़रिए सोलर पंप/प्लांट लगाया जाता है, और सब्सिडी सीधे लागत में समायोजित होती है।