यह योजना क्या देती है
24 अप्रैल 2020 को शुरू हुई इस योजना से पहले, भारत के अधिकतर गांवों में घर-मालिकों के पास अपनी संपत्ति का कोई औपचारिक, कानूनी दस्तावेज़ नहीं होता था — जिससे वे बैंक से ऋण नहीं ले पाते थे, चाहे उनकी संपत्ति कितनी भी कीमती क्यों न हो। स्वामित्व योजना ड्रोन का उपयोग करके गांव की आबादी वाली भूमि (रिहायशी क्षेत्र) का सटीक सर्वेक्षण करती है, और उसके आधार पर हर घर-मालिक को एक कानूनी संपत्ति कार्ड (प्रॉपर्टी कार्ड) जारी करती है। यह कार्ड संपत्ति के मालिकाना हक का प्रमाण है, जिसे बैंक ऋण के लिए गिरवी रखा जा सकता है, संपत्ति विवाद कम होते हैं, और संपत्ति कर का सही आकलन भी संभव होता है।
कौन पात्र है
- गांव की आबादी वाली भूमि (आवासीय क्षेत्र) में घर/संपत्ति का मालिक कोई भी ग्रामीण निवासी।
- यह योजना चरणबद्ध तरीके से राज्यों और ज़िलों में लागू हो रही है — अपने गांव में सर्वेक्षण की स्थिति देखें।
आवश्यक दस्तावेज़
- निवास का कोई मौजूदा प्रमाण (यदि उपलब्ध हो)
- आधार कार्ड
- संपत्ति पर दावे का कोई स्थानीय दस्तावेज़, जहां उपलब्ध हो
संपत्ति कार्ड कैसे प्राप्त करें
- अपनी ग्राम पंचायत से पता करें कि आपके गांव में ड्रोन सर्वेक्षण हुआ है या होने वाला है।
- सर्वेक्षण के दौरान, अपनी संपत्ति की सीमाओं के बारे में सटीक जानकारी दें और किसी भी विवाद को स्थानीय स्तर पर सुलझाने में सहयोग करें।
- प्रारंभिक संपत्ति मानचित्र (ड्राफ्ट) सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाता है — आपत्ति होने पर तय समय में दर्ज कराएं।
- आपत्तियों के निपटारे के बाद, अंतिम संपत्ति कार्ड जारी किया जाता है।
- svamitva.nic.in पर अपने गांव की सर्वेक्षण स्थिति और अपना डिजिटल संपत्ति कार्ड देखा जा सकता है।