यह योजना क्या देती है
14 अप्रैल 2018 को शुरू हुई यह योजना उस समस्या को हल करती है जो लंबे समय से आदिवासी समुदायों को परेशान करती रही है — जंगल से जड़ी-बूटी, शहद, महुआ, बांस, गोंद, इमली जैसी बहुमूल्य उपज इकट्ठा करने के बावजूद, बिचौलियों को बेचने पर बहुत कम दाम मिलना। वन धन विकास केंद्र (VDVK) — आमतौर पर हर केंद्र में 15 स्वयं सहायता समूह, कुल 300 सदस्य — इकट्ठा की गई उपज को प्राथमिक स्तर पर प्रोसेस, साफ, और पैक करना सिखाते हैं, जिससे उसकी बाज़ार कीमत काफी बढ़ जाती है। TRIFED इन उत्पादों को "ट्राइब्स इंडिया" ब्रांड के तहत बेचने में भी मदद करता है, जिससे आदिवासी उत्पादकों को सीधे बेहतर बाज़ार तक पहुंच मिलती है।
कौन पात्र है
- वनोपज इकट्ठा करने वाले आदिवासी (जनजातीय) व्यक्ति और परिवार।
- स्वयं सहायता समूह (SHG) के रूप में संगठित होना, या मौजूदा वन धन विकास केंद्र से जुड़ना।
- अनुसूचित जनजाति (ST) बहुल क्षेत्रों में प्राथमिकता।
आवश्यक दस्तावेज़
- जाति (जनजाति) प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड
- स्वयं सहायता समूह पंजीकरण, जहां लागू हो
कैसे जुड़ें
- अपने क्षेत्र में TRIFED या राज्य के जनजातीय कल्याण विभाग से नज़दीकी वन धन विकास केंद्र की जानकारी लें।
- अपने स्वयं सहायता समूह के साथ केंद्र में पंजीकरण कराएं, या नया समूह बनाने में मदद लें।
- प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों का मुफ्त प्रशिक्षण प्राप्त करें।
- केंद्र में उपलब्ध प्रोसेसिंग उपकरणों का उपयोग कर अपनी उपज को बाज़ार-योग्य उत्पाद में बदलें।
- TRIFED या स्थानीय बाज़ार चैनलों के ज़रिए बेहतर दाम पर बिक्री करें।