यह योजना क्या देती है
संत सूरदास योजना गुजरात की गंभीर दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए योजना है, जिसे अक्सर गलती से सामान्य दिव्यांग पेंशन बताया जाता है। यह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत 80% या अधिक दिव्यांगता वाले 0 से 17 वर्ष के बच्चों को सीधे हस्तांतरण से ₹1,000 प्रति माह देती है, और बच्चे के 18 वर्ष के होते ही सहायता बंद हो जाती है। उद्देश्य परिवार में देखभाल और विकास का खर्च हल्का करना है। दिव्यांगता प्रमाणित होनी चाहिए, वैध दिव्यांगता कार्ड या UDID के साथ, और आवेदन में 20 तक स्कोर वाली BPL सूची का प्रमाण मांगा जाता है — हालांकि कुछ सारांश कहते हैं कि कोई आय शर्त नहीं है, इसलिए ज़िला कार्यालय से जांच लें। ₹600 मासिक बताने वाले पुराने स्रोत पुराने पड़ चुके हैं।
कौन पात्र है
- बच्चा गुजरात का मूल निवासी हो।
- आयु 0 से 17 वर्ष के बीच; बच्चे के 18 वर्ष के होने पर सहायता समाप्त हो जाती है।
- 80% या अधिक दिव्यांगता (दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत बेंचमार्क दिव्यांगता), वैध दिव्यांगता कार्ड या UDID के साथ।
- आवेदन में परिवार के BPL सूची में 20 तक स्कोर के साथ होने का प्रमाण मांगा जाता है — अपने ज़िले में यह लागू है या नहीं, पुष्टि करें।
आवश्यक दस्तावेज़
- बच्चे का पासपोर्ट आकार का फोटो
- बच्चे का आधार कार्ड
- UDID कार्ड या दिव्यांगता प्रमाण पत्र (80% या अधिक)
- निवास का प्रमाण
- 20 तक स्कोर वाला BPL सूची प्रमाण पत्र
- जाति प्रमाण पत्र, यदि लागू हो
- बैंक पासबुक का प्रथम पृष्ठ या रद्द चेक
आवेदन कैसे करें
- अपने ज़िला समाज सुरक्षा अधिकारी या नज़दीकी समाज कल्याण कार्यालय जाएं।
- संत सूरदास योजना का आवेदन फॉर्म लें और भरें।
- दिव्यांगता प्रमाण पत्र या UDID सहित ऊपर बताए दस्तावेज़ संलग्न करें।
- सत्यापन और स्वीकृति के लिए फॉर्म जमा करें।
- स्वीकृति के बाद बच्चे के 18 वर्ष के होने तक ₹1,000 प्रति माह DBT से बैंक खाते में आते हैं।