यह योजना क्या देती है
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत बना NALSA का नेटवर्क — राज्य, ज़िला और तालुका स्तर तक फैला हुआ — यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति सिर्फ पैसों की कमी के कारण कानूनी सहायता से वंचित न रहे। पात्र व्यक्तियों को अदालत में मुफ्त वकील, कानूनी दस्तावेज़ तैयार करने में मदद, मध्यस्थता और सुलह (मध्यस्थता के ज़रिए विवाद सुलझाना), और कानूनी सलाह मुफ्त में मिलती है। इसमें दीवानी (सिविल) और फौजदारी (क्रिमिनल) दोनों तरह के मामले शामिल हैं — पारिवारिक विवाद, संपत्ति के मामले, श्रमिक अधिकार, उपभोक्ता शिकायतें, और आपराधिक मामलों में बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व।
कौन पात्र है
- अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के सदस्य।
- महिलाएं और बच्चे (लिंग या उम्र की परवाह किए बिना, ये स्वतः पात्र हैं)।
- दिव्यांग व्यक्ति।
- औद्योगिक कामगार, मानव तस्करी के शिकार, हिरासत में मौजूद व्यक्ति।
- ₹3 लाख से कम वार्षिक आय वाले व्यक्ति (राज्य के अनुसार सीमा अलग हो सकती है)।
- आपदा या जातीय हिंसा के पीड़ित।
आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- आय प्रमाण पत्र (जहां आय आधारित पात्रता लागू हो)
- जाति प्रमाण पत्र (SC/ST श्रेणी के लिए)
- मामले से जुड़े दस्तावेज़, जहां उपलब्ध हों
सहायता कैसे प्राप्त करें
- अपने ज़िले के ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) कार्यालय में जाएं, जो हर ज़िला अदालत परिसर में मौजूद होता है।
- अपनी पात्रता श्रेणी और मामले की जानकारी के साथ आवेदन फॉर्म भरें।
- nalsa.gov.in के ज़रिए भी ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
- पात्रता की पुष्टि होने पर, प्राधिकरण आपके मामले के लिए एक मुफ्त वकील नियुक्त करता है।
- टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100 पर कॉल करके भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है।