यह योजना क्या देती है
भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा — बुनाई, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी, धातु शिल्प, कढ़ाई — को ज़िंदा रखने वाले लाखों कारीगर अक्सर बाज़ार तक सही पहुंच न होने के कारण कम दाम पर बेचने को मजबूर होते हैं। यह कार्यक्रम कारीगरों को कच्चे माल की उपलब्धता में मदद, आधुनिक डिज़ाइन प्रशिक्षण (ताकि उत्पाद वर्तमान बाज़ार की पसंद के अनुरूप हों), हस्तशिल्प मेलों और प्रदर्शनियों में स्टॉल, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री में सहायता, और शिल्प विकास के लिए वित्तीय सहायता जैसी कई सेवाएं देता है। कारीगरों के लिए पहचान पत्र भी जारी किए जाते हैं, जो उन्हें अन्य कल्याण योजनाओं से जोड़ने में मदद करते हैं।
कौन पात्र है
- पारंपरिक हस्तशिल्प कारीगर — बुनकर, मूर्तिकार, कुम्हार, नक्काशी करने वाले, और अन्य शिल्पकार।
- व्यक्तिगत कारीगर, स्वयं सहायता समूह, या हस्तशिल्प सहकारी समितियां।
- कारीगर पहचान पत्र (Artisan ID Card) रखने वाले प्राथमिकता में हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- कारीगर पहचान पत्र, यदि उपलब्ध हो (या पंजीकरण के लिए आवेदन)
- अपने शिल्प का प्रमाण (नमूना/फोटो)
- बैंक खाता विवरण
आवेदन कैसे करें
- handicrafts.nic.in पर जाकर या अपने ज़िले के हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय से संपर्क करें।
- कारीगर पहचान पत्र के लिए पंजीकरण कराएं, यदि अभी तक नहीं बना है।
- अपनी ज़रूरत (कच्चा माल, प्रशिक्षण, या मार्केटिंग सहायता) के अनुसार संबंधित योजना घटक के लिए आवेदन करें।
- स्वीकृति के बाद, सहायता (सामग्री, प्रशिक्षण, या मेले में भागीदारी का अवसर) प्रदान की जाती है।