यह योजना क्या देती है
10 सितंबर 2020 को शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में "नीली क्रांति" लाना है — मछली उत्पादन बढ़ाकर मछुआरों और मछली पालकों की आय दोगुनी करना। इसके तहत नया तालाब/जलाशय बनाने, मछली के बीज (हैचरी), कोल्ड स्टोरेज एवं कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, मछली पकड़ने की नाव और जाल, बर्फ बनाने की इकाई, और आधुनिक फिश मार्केट के निर्माण के लिए सब्सिडी दी जाती है। सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40% तक और SC/ST/महिला लाभार्थियों को 60% तक सब्सिडी मिलती है — बाकी राशि लाभार्थी का अपना योगदान या बैंक ऋण होता है।
कौन पात्र है
- मछुआरे, मछली पालक (एक्वाकल्चर करने वाले), मछली विक्रेता, और मत्स्य सहकारी समितियां।
- स्वयं सहायता समूह और मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (FFPO) भी पात्र हैं।
- उद्यमी जो मत्स्य प्रसंस्करण या मार्केटिंग से जुड़े व्यवसाय में निवेश करना चाहते हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- भूमि/जल क्षेत्र के दस्तावेज़ (तालाब/जलाशय की परियोजना के लिए)
- परियोजना प्रस्ताव
- बैंक खाता विवरण
- जाति प्रमाण पत्र, जहां लागू हो (उच्च सब्सिडी के लिए)
आवेदन कैसे करें
- pmmsy.dof.gov.in पर जाकर या अपने राज्य के मत्स्य विभाग से संपर्क करें।
- अपनी परियोजना (तालाब निर्माण, नाव खरीद, आदि) की विस्तृत जानकारी के साथ आवेदन करें।
- राज्य मत्स्य विभाग द्वारा परियोजना की समीक्षा और तकनीकी स्वीकृति दी जाती है।
- बैंक ऋण की व्यवस्था के साथ, स्वीकृत सब्सिडी राशि परियोजना लागत में समायोजित होती है।
- परियोजना पूरी होने पर, विभाग द्वारा सत्यापन के बाद अंतिम सब्सिडी जारी की जाती है।