यह योजना क्या देती है
दिसंबर 2014 में शुरू हुआ यह मिशन भारत की देसी गाय नस्लों (जैसे गिर, साहीवाल, राठी, थारपारकर) के संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से नस्ल सुधार पर केंद्रित है — इन नस्लों में अक्सर विदेशी नस्लों की तुलना में स्थानीय जलवायु के अनुकूल होने, रोग प्रतिरोधक क्षमता, और A2 दूध जैसी विशेषताएं होती हैं, लेकिन दूध उत्पादन कम होता है। मिशन के तहत गौशालाओं और नस्ल सुधार केंद्रों की स्थापना, उन्नत बैल/वीर्य की उपलब्धता, कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं का विस्तार, और किसानों को बेहतर पशुपालन प्रथाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है — ताकि देसी नस्लों की दूध उत्पादकता बढ़े और किसानों की आय में सुधार हो।
यह किसके लिए है
- पशुपालक किसान जो देसी गाय नस्लें रखते हैं या इनकी नस्ल सुधार सेवाओं का लाभ लेना चाहते हैं।
- गौशालाएं और डेयरी सहकारी समितियां भी सहायता के लिए पात्र हो सकती हैं।
सेवाओं का लाभ कैसे लें
- अपने नज़दीकी पशु चिकित्सा अस्पताल या कृत्रिम गर्भाधान केंद्र से संपर्क करें।
- उन्नत बैल/वीर्य के ज़रिए कृत्रिम गर्भाधान सेवा का लाभ उठाएं — आमतौर पर मामूली या मुफ्त शुल्क पर।
- dahd.nic.in पर अपने राज्य में चल रही गोकुल मिशन परियोजनाओं की जानकारी देखी जा सकती है।
- पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लें।