यह योजना क्या देती है
2015 में शुरू हुई उस्ताद (परंपरागत कला/शिल्प के उन्नयन के लिए कौशल एवं प्रशिक्षण) योजना अल्पसंख्यक समुदाय के उन पारंपरिक कारीगरों के लिए है जो पीढ़ियों से चली आ रही शिल्पकला — जैसे ज़री का काम, चिकनकारी, नक्काशी, या अन्य पारंपरिक दस्तकारी — में माहिर हैं, लेकिन आधुनिक डिज़ाइन और बाज़ार के रुझान से जुड़ाव की कमी के कारण अपनी कला से पर्याप्त आय नहीं कमा पाते। इस योजना के तहत मास्टर कारीगरों ("उस्ताद") द्वारा नई पीढ़ी को प्रशिक्षण, नए डिज़ाइन और तकनीक की जानकारी, और राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी का अवसर दिया जाता है, ताकि पारंपरिक कला संरक्षित भी रहे और आर्थिक रूप से टिकाऊ भी बने।
कौन पात्र है
- अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी) का पारंपरिक शिल्पकार या दस्तकार।
- पारंपरिक कला/शिल्प में अनुभव रखने वाला व्यक्ति, चाहे वह प्रशिक्षु हो या मास्टर कारीगर ("उस्ताद")।
आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- अल्पसंख्यक समुदाय प्रमाण
- अपने शिल्प का प्रमाण (नमूना/फोटो/अनुभव प्रमाण पत्र)
आवेदन कैसे करें
- minorityaffairs.gov.in पर जाकर या अपने क्षेत्र में सूचीबद्ध कार्यान्वयन एजेंसी से संपर्क करें।
- अपने शिल्प और अनुभव की जानकारी के साथ पंजीकरण कराएं।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हों — मास्टर कारीगर से नई तकनीक और डिज़ाइन सीखें।
- प्रशिक्षण पूरा होने पर, प्रदर्शनियों और बाज़ार जुड़ाव के अवसर मिलते हैं।