यह योजना क्या देती है
नाम के बावजूद, निःशुल्क बोरिंग योजना एक अनुदान योजना है: लघु सिंचाई विभाग आपके लिए कुआं नहीं खोदता, बल्कि उस पर एक तय राशि की प्रतिपूर्ति करता है। सामान्य वर्ग के लघु किसानों के लिए बोरिंग अनुदान ₹5,000 तक और सीमांत किसानों के लिए ₹7,000 तक है; एससी/एसटी के लघु और सीमांत किसानों को ₹10,000 तक मिलता है। पंप सेट खरीदकर लगाने पर अलग अनुदान मिलता है — ₹4,500 (लघु), ₹6,000 (सीमांत) और एससी/एसटी के लिए ₹9,000 तक — और HDPE डिलीवरी पाइप की लागत का 50% (₹3,000 तक) भी मिल सकता है। जो वेबसाइटें 5 HP तक के पंप सहित पूरी तरह मुफ्त बोरिंग का वादा करती हैं, वे विभाग की प्रकाशित दरों से मेल नहीं खातीं, इसलिए शुरू करने से पहले अपने ब्लॉक लघु सिंचाई कार्यालय में वर्तमान आंकड़ों की पुष्टि करें।
कौन पात्र है
- उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासी, जिनके पास राज्य में कृषि भूमि हो।
- लघु किसान (2 हेक्टेयर तक) या सीमांत किसान (1 हेक्टेयर तक)।
- भूमि पर सिंचाई का कोई मौजूदा स्रोत न हो, और उसी उद्देश्य के लिए किसी अन्य सिंचाई योजना का लाभ न ले रहे हों।
- एससी/एसटी लघु और सीमांत किसानों को अधिक अनुदान मिलता है; लघु और सीमांत किसानों के समूह अधिक अनुदान हिस्से पर सामूहिक नलकूप के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- जोत दर्शाने वाली भूमि की खतौनी
- बैंक खाते का विवरण
- एससी/एसटी दरों के लिए जाति प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट आकार का फोटो
- दावे के चरण पर पंप सेट और पाइप के बिल
आवेदन कैसे करें
- minorirrigationup.gov.in पर जाकर निःशुल्क बोरिंग योजना का आवेदन खोलें, या अपने ब्लॉक लघु सिंचाई कार्यालय जाएं।
- भूमि और बैंक विवरण के साथ आवेदन भरें और दस्तावेज़ लगाएं।
- विभाग आपकी पात्रता का सत्यापन कर बोरिंग को मंज़ूरी देता है।
- बोरिंग कराएं और पंप अनुदान चाहिए तो पंप सेट खरीदकर लगाएं।
- सत्यापन के लिए बिल जमा करें; अधिकारियों द्वारा खर्च की जांच के बाद शेष अनुदान दिया जाता है।