यह योजना क्या देती है
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में परंपरागत रूप से महिलाएं ही अपने पशुओं के लिए जंगल या खेत से चारा (घास) काटकर लाने और हाथ से काटने का कठिन और समय लेने वाला काम करती हैं — इसमें रोज़ाना घंटों की मेहनत लगती है। "घस्यारी" (चारा काटने वाली महिला) के इसी श्रम को कम करने के लिए यह योजना बनाई गई है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को बिजली या हाथ से चलने वाली चारा कटाई मशीन (चैफ कटर) मुफ्त या भारी सब्सिडी पर दी जाती है — इससे चारा काटने का समय और मेहनत दोनों काफी कम हो जाते हैं, और महिलाओं को अन्य कामों के लिए समय मिलता है।
कौन पात्र है
- उत्तराखंड की ग्रामीण महिला, जो पशुपालन से जुड़ी हो (गाय, भैंस पालने वाली)।
- स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिलाओं को प्राथमिकता।
आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- पशुपालन प्रमाण (पशु संख्या का विवरण)
- निवास प्रमाण पत्र
- स्वयं सहायता समूह सदस्यता प्रमाण, जहां लागू हो
आवेदन कैसे करें
- अपने नज़दीकी पशुपालन विभाग कार्यालय या ब्लॉक कार्यालय से संपर्क करें।
- dahd.uk.gov.in पर भी जानकारी और आवेदन प्रक्रिया देखी जा सकती है।
- आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ आवेदन जमा करें।
- स्वीकृति के बाद, चारा कटाई मशीन मुफ्त या सब्सिडी दर पर वितरित की जाती है।